अंगूठा लगाने वाले खातेदार बैंक से ATM और चेकबुक कैसे लें? जानिए RBI का नियम

अंगूठा लगाने वाले खातेदार बैंक से ATM और चेकबुक कैसे लें? जानिए RBI का नियम

आज के इस डिजिटल और आधुनिक युग में बैंकिंग सेवाएं हर नागरिक के जीवन का एक अनिवार्य हिस्सा बन चुकी हैं। देश में ‘डिजिटल इंडिया’ और ‘वित्तीय समावेशन’ (Financial Inclusion) के अभियानों के तहत करोड़ों नए बैंक खाते खोले गए हैं। लेकिन इन सब के बीच एक बहुत बड़ा वर्ग ऐसा भी है जो पढ़ा-लिखा नहीं है, या किसी शारीरिक असमर्थता के कारण हस्ताक्षर (Signature) नहीं कर सकता और बैंक के दस्तावेजों पर केवल अपने अंगूठे का निशान (Thumb Impression) लगाता है।

अक्सर ग्रामीण और अर्ध-शहरी इलाकों में यह देखा जाता है कि जब कोई अंगूठा लगाने वाला ग्राहक (Illiterate Account Holder) बैंक में एटीएम कार्ड (ATM Card) या चेकबुक (Cheque Book) के लिए आवेदन करता है, तो बैंक कर्मचारी सुरक्षा या नियमों का हवाला देकर उन्हें मना कर देते हैं। ग्राहकों को कह दिया जाता है कि— “चूंकि आप साइन नहीं कर सकते, इसलिए आपको चेकबुक या एटीएम नहीं मिल सकता।”

लेकिन क्या वाकई भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) का ऐसा कोई नियम है?

जवाब है— बिल्कुल नहीं! आरबीआई के नियम इसके बिल्कुल उलट हैं। रिजर्व बैंक ऑफ इंडिया का स्पष्ट आदेश है कि बैंकों को अपने हर एक ग्राहक को समान अधिकार और सुविधाएं देनी होंगी, चाहे वह पढ़ा-लिखा हो या निरक्षर।

अगर आप या आपके परिवार का कोई सदस्य अंगूठा लगाता है और आप बैंक से एटीएम और चेकबुक की सुविधा प्राप्त करना चाहते हैं, तो यह विस्तृत आर्टिकल आपके लिए ही है। इस मेगा-गाइड में हम आरबीआई के सभी नियमों, कानूनी अधिकारों, आवेदन की प्रक्रिया और सुरक्षा उपायों पर विस्तार से चर्चा करेंगे।

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Table of Contents

1. क्या अंगूठा लगाने वाले ग्राहकों को ATM और चेकबुक मिल सकती है?

जी हाँ, कानूनी और आधिकारिक तौर पर देश के सभी सरकारी, प्राइवेट और ग्रामीण बैंकों में अंगूठा लगाने वाले खाताधारकों को एटीएम (डेबिट) कार्ड और चेकबुक दोनों प्राप्त करने का पूरा अधिकार है।

अक्सर लोगों में यह गलतफहमी होती है कि चेकबुक और एटीएम केवल उन्हीं लोगों के लिए हैं जो अंग्रेजी या हिंदी में सुचारू रूप से हस्ताक्षर कर सकते हैं। बैंकिंग नियमों के अनुसार, “हस्ताक्षर” (Signature) और “अंगूठे का निशान” (Thumb Impression) दोनों को कानूनी रूप से व्यक्ति की पहचान के रूप में समान मान्यता प्राप्त है। इसलिए, कोई भी बैंक सिर्फ साक्षरता की कमी के आधार पर किसी नागरिक को बैंकिंग की आधुनिक सुविधाओं से वंचित नहीं रख सकता।

2. समानता का अधिकार: RBI का मास्टर सर्कुलर क्या कहता है?

भारतीय रिजर्व बैंक समय-समय पर बैंकों के लिए ‘मास्टर सर्कुलर ऑन कस्टमर सर्विस’ (Master Circular on Customer Service in Banks) जारी करता है। इस सर्कुलर में निरक्षर या कम पढ़े-लिखे ग्राहकों के अधिकारों को लेकर बेहद कड़े निर्देश दिए गए हैं।

RBI के नियमों के मुख्य बिंदु इस प्रकार हैं:

भेदभाव का निषेध: बैंकों को अपने काउंटरों पर पढ़े-लिखे और अनपढ़ ग्राहकों के बीच किसी भी प्रकार का भेदभाव करने की अनुमति नहीं है।

सभी सुविधाओं तक पहुंच: एक सामान्य बचत खाते (Savings Account) पर मिलने वाली सभी बुनियादी सुविधाएं जैसे— एटीएम कार्ड, चेकबुक, नेट बैंकिंग (सीमित/व्यू मोड), लॉकर की सुविधा और लोन के लिए आवेदन करने का अधिकार, अंगूठा लगाने वाले खाताधारकों को भी समान रूप से मिलता है।

बैंकों की जिम्मेदारी: बैंकों की यह जिम्मेदारी है कि वे ऐसे ग्राहकों को बैंकिंग प्रक्रियाओं को आसान भाषा में समझाएं और उनकी मदद के लिए हेल्प-डेस्क या ग्राहक मित्र की व्यवस्था करें।

3. अंगूठा लगाने वालों के लिए एटीएम (ATM) जारी करने के नियम

पहले के समय में बैंक सुरक्षा कारणों से निरक्षर खाताधारकों को एटीएम कार्ड देने से बचते थे, क्योंकि एटीएम पिन (PIN) लीक होने का खतरा रहता था। लेकिन अब आरबीआई ने तकनीक और सुरक्षा दोनों को मजबूत करते हुए इसे अनिवार्य कर दिया है।

रुपए (RuPay) कार्ड की अनिवार्यता: प्रधानमंत्री जन धन योजना (PMJDY) के तहत खोले गए अधिकांश खाते अंगूठे के निशान वाले हैं। आरबीआई ने इन सभी खातों के साथ RuPay Debit Card देना अनिवार्य किया है।

स्वतंत्र उपयोग: खाताधारक इस एटीएम कार्ड का उपयोग देश के किसी भी एटीएम मशीन से पैसे निकालने, बैलेंस चेक करने या मिनी स्टेटमेंट निकालने के लिए स्वतंत्र रूप से कर सकता है।

डिजिटल लेनदेन का अधिकार: इस एटीएम कार्ड की मदद से वे पीओएस (POS) मशीनों या दुकानों पर भी (यदि वे पिन दर्ज करने में सक्षम हैं) लेनदेन कर सकते हैं।

4. टॉकिंग एटीएम (Talking ATMs) और ब्रेल लिपि की सुविधा

कम पढ़े-लिखे या दृष्टिबाधित (Visually Impaired) ग्राहकों की सुविधा के लिए आरबीआई ने बैंकों को तकनीक अपग्रेड करने के निर्देश दिए हैं।

वॉयस गाइडेंस (Voice Guidance): देश के अधिकांश एटीएम अब ‘टॉकिंग एटीएम’ में बदल चुके हैं। जैसे ही ग्राहक एटीएम में अपना कार्ड डालता है और हेडफोन लगाता है, एटीएम मशीन बोलकर (हिंदी, अंग्रेजी या स्थानीय भाषा में) पूरी प्रक्रिया समझाती है कि पिन कहाँ डालना है और पैसे कैसे निकालने हैं।

ब्रेल कीपैड: एटीएम मशीनों के कीपैड पर उभरे हुए अक्षर (Braille) होते हैं, जिससे ऐसे लोग जो देख नहीं सकते या अक्षरों को पहचानते हैं, वे आसानी से नंबर दबा सकते हैं।

5. चेकबुक (Cheque Book) जारी करने के सख्त और सुरक्षित नियम

चेकबुक एक बेहद संवेदनशील वित्तीय दस्तावेज है। हस्ताक्षर करने वाले लोगों के चेक का मिलान तो बैंक आसानी से कर लेता है, लेकिन अंगूठे के निशान के मामले में धोखाधड़ी की गुंजाइश बढ़ जाती है। इसलिए आरबीआई ने चेकबुक जारी करने और उसके इस्तेमाल को लेकर कुछ विशेष सुरक्षा नियम बनाए हैं:

बाएं हाथ का अंगूठा (Left Hand Thumb Impression – LHTI): नियम के अनुसार, पुरुष खाताधारकों के बाएं हाथ के अंगूठे का निशान और महिला खाताधारकों के दाएं हाथ के अंगूठे का निशान (कुछ बैंकों में दोनों के लिए बाएं हाथ का नियम ही लागू है) चेक पर मान्य होता है।

चेक बुक पर विशेष मार्किंग: कुछ बैंक अंगूठा लगाने वाले ग्राहकों की चेकबुक पर एक विशेष मुहर या मार्किंग लगा देते हैं, जिससे यह पहचान हो सके कि यह खाताधारक हस्ताक्षर नहीं करता है।

स्वयं उपस्थिति की शर्त: यदि अंगूठा लगाने वाला खाताधारक चेक के माध्यम से बैंक से बड़ी राशि निकालना चाहता है, तो उसे स्वयं बैंक शाखा में जाना होगा। बैंक अधिकारी के सामने दोबारा अंगूठा लगाने और पहचान सत्यापित होने के बाद ही कैश दिया जाता है।

6. अंगूठा लगाने वाले ग्राहकों के लिए चेक क्लियरिंग की प्रक्रिया

यदि कोई पढ़ा-लिखा व्यक्ति किसी अन्य व्यक्ति के नाम चेक काटता है, तो वह चेक सीधे क्लियरिंग हाउस (CTS – Cheque Truncation System) के जरिए पास हो जाता है। लेकिन अंगूठा लगाने वाले ग्राहकों के लिए प्रक्रिया थोड़ी भिन्न होती है:

थर्ड पार्टी पेमेंट पर सीमाएं: बैंक आमतौर पर अंगूठा लगाने वाले ग्राहकों द्वारा किसी तीसरे व्यक्ति (Third Party) के नाम जारी किए गए ‘बियरर चेक’ (Bearer Cheque) पर सीधे काउंटर से नकद भुगतान नहीं करते हैं।

अकाउंट पेयी चेक (Account Payee): यदि अंगूठा लगाने वाला ग्राहक किसी को चेक दे रहा है, तो सुरक्षा के लिहाज से उस चेक पर “Account Payee Only” लिखना या दो क्रॉस लाइनें खींचना जरूरी होता है, ताकि पैसा सीधे सामने वाले के बैंक खाते में ही जाए, न कि काउंटर से कैश मिले।

सत्यापन (Verification): जब ऐसा चेक क्लियरिंग के लिए आता है, तो बैंक अधिकारी खाताधारक के रजिस्टर्ड अंगूठे के निशान का मिलान सिस्टम में मौजूद स्कैन किए गए निशान से बहुत बारीकी से करते हैं।

7. संयुक्त खाता (Joint Account) होने पर क्या हैं नियम?

कई बार अंगूठा लगाने वाले बुजुर्ग या महिलाएं अपने परिवार के किसी पढ़े-लिखे सदस्य (जैसे बेटे, बेटी या पति/पत्नी) के साथ Joint Account खोलते हैं। ऐसी स्थिति में एटीएम और चेकबुक के नियम बहुत आसान हो जाते हैं:

Either or Survivor (कोई एक या जीवित): यदि खाता ‘आइदर और सर्वाइवर’ मोड में है, तो पढ़े-लिखे सदस्य के हस्ताक्षर से ही चेकबुक और एटीएम जारी हो जाते हैं। दोनों सदस्यों को अलग-अलग एटीएम कार्ड भी मिल सकते हैं।

Jointly Operated (संयुक्त रूप से): यदि खाता इस मोड में है कि दोनों की सहमति के बिना लेनदेन नहीं होगा, तो चेक पर पढ़े-लिखे व्यक्ति के हस्ताक्षर और अंगूठा लगाने वाले व्यक्ति के अंगूठे का निशान— दोनों एक साथ होना अनिवार्य है।

8. कदम-दर-कदम प्रक्रिया: ATM और चेकबुक के लिए कैसे अप्लाई करें?

अगर आप बैंक जाकर इन सुविधाओं के लिए आवेदन करना चाहते हैं, तो इस आसान प्रक्रिया का पालन करें:

स्टेप 1: अपनी होम ब्रांच में जाएं

खाताधारक को अपने उस बैंक की शाखा में जाना होगा जहाँ उसका खाता खुला हुआ है। किसी अन्य शाखा से यह प्रक्रिया पूरी नहीं की जा सकती क्योंकि मुख्य दस्तावेज और मूल अंगूठे के निशान होम ब्रांच में ही सुरक्षित होते हैं।

स्टेप 2: आवेदन फॉर्म प्राप्त करें

बैंक के हेल्पडेस्क या काउंटर से “एटीएम कार्ड/चेकबुक रिक्वेस्ट फॉर्म” लें। चूंकि खाताधारक खुद फॉर्म नहीं भर सकता, इसलिए उनके साथ गया कोई पारिवारिक सदस्य या खुद बैंक का कर्मचारी उस फॉर्म को भर सकता है।

स्टेप 3: अंगूठे का निशान लगाना

फॉर्म के अंत में जहाँ ‘हस्ताक्षर’ का कॉलम होता है, वहाँ खाताधारक को बैंक के अधिकृत अधिकारी (Authorized Officer) के सामने अपने अंगूठे का साफ निशान लगाना होगा।

स्टेप 4: बैंक अधिकारी द्वारा सत्यापन

बैंक अधिकारी फॉर्म पर एक मुहर लगाएगा जिसमें लिखा होता है— “Thumb impression taken in my presence” (यानी अंगूठे का निशान मेरी उपस्थिति में लिया गया है)। इसके बाद अधिकारी अपने हस्ताक्षर करके इसे प्रमाणित करेगा।

9. आवेदन के लिए आवश्यक दस्तावेज (Documents Checklist)

बैंक जाने से पहले यह सुनिश्चित कर लें कि आपके पास निम्नलिखित सभी आवश्यक दस्तावेज मौजूद हैं ताकि आपको बार-बार चक्कर न लगाने पड़ें:

दस्तावेज का नामविवरण
बैंक पासबुक (Original & Photocopy)आपकी वर्तमान पासबुक
आधार कार्ड (Aadhaar Card)पहचान और पते का प्रमाण
पैन कार्ड या फॉर्म 60पैन कार्ड की कॉपी (यदि उपलब्ध हो)
पासपोर्ट साइज फोटो2 नई रंगीन फोटो

10. गवाह (Witness) के नियम: कौन बन सकता है गवाह?

चूंकि अंगूठा लगाने वाले मामलों में कानूनी जोखिम थोड़ा अधिक होता है, इसलिए कई बैंक एटीएम या चेकबुक जारी करते समय एक या दो गवाहों (Witnesses) के हस्ताक्षर की मांग करते हैं।

कौन बन सकता है गवाह? गवाह कोई भी ऐसा व्यक्ति बन सकता है जिसका उसी बैंक शाखा में पहले से एक सक्रिय (Active) खाता हो और जिसके हस्ताक्षर बैंक के रिकॉर्ड में सत्यापित हों।

बैंक कर्मचारियों की भूमिका: कुछ मामलों में, यदि ग्राहक के पास कोई गवाह उपलब्ध नहीं है, तो बैंक के अधिकारी खुद ग्राहक की पहचान की पुष्टि करके गवाह के रूप में फॉर्म को आगे बढ़ा सकते हैं।

गवाह की जिम्मेदारी: गवाह केवल इस बात को प्रमाणित करता है कि अंगूठा लगाने वाला व्यक्ति वही है जिसका नाम खाते में दर्ज है, वह ग्राहक के किसी भी वित्तीय लेनदेन या लोन के लिए जिम्मेदार नहीं होता है।

11. अंगूठा लगाने वाले ग्राहकों के लिए वित्तीय सुरक्षा और धोखाधड़ी से बचाव

डिजिटल बैंकिंग के इस दौर में साइबर फ्रॉड और ऑनलाइन धोखाधड़ी के मामले बहुत तेजी से बढ़े हैं। कम पढ़े-लिखे या अंगूठा लगाने वाले ग्राहक अक्सर इन जालसाजों के आसान शिकार बन जाते हैं। इसलिए, एटीएम और चेकबुक का उपयोग करते समय नीचे दी गई बातों का कड़ाई से पालन करना चाहिए:

एटीएम पिन (PIN) की गोपनीयता: अपना 4 अंकों का एटीएम पिन कभी भी किसी कागज पर लिखकर एटीएम कार्ड के साथ न रखें। इसे केवल याद रखें।

अजनबी लोगों से दूरी: एटीएम से पैसे निकालते समय यदि कोई दिक्कत आए, तो किसी अज्ञात व्यक्ति की मदद लेने के बजाय बैंक के सुरक्षा गार्ड या बैंक के अंदर मौजूद कर्मचारी से ही सहायता मांगें।

खाली चेक पर अंगूठा न लगाएं: कभी भी किसी भी परिस्थिति में खाली चेक (Blank Cheque) पर पहले से अपना अंगूठा लगाकर न रखें। जब भी किसी को भुगतान करना हो, उसी समय राशि और तारीख भरकर अंगूठा लगाएं।

एसएमएस अलर्ट (SMS Alerts): खाते के साथ परिवार के किसी पढ़े-लिखे और भरोसेमंद सदस्य (जैसे बेटा या बेटी) का मोबाइल नंबर जरूर लिंक कराएं, ताकि खाते से ₹1 भी निकले तो तुरंत मोबाइल पर मैसेज आ जाए और किसी भी अनधिकृत लेनदेन का पता तुरंत चल सके।

12. यदि बैंक सुविधाएं देने से मना करे, तो शिकायत कहाँ और कैसे करें?

दुर्भाग्य से, यदि किसी बैंक शाखा का स्टाफ या मैनेजर नियमों की अनदेखी करता है और अंगूठा लगाने वाले खाताधारक को एटीएम या चेकबुक देने से साफ मना कर देता है, तो आपके पास कानूनी तौर पर शिकायत करने के पूरे अधिकार हैं। आप निम्नलिखित चरणों में अपनी शिकायत दर्ज करा सकते हैं:

चरण 1: शाखा प्रबंधक (Branch Manager) से लिखित शिकायत

सबसे पहले बैंक के ब्रांच मैनेजर से मिलें। उन्हें आरबीआई के ‘मास्टर सर्कुलर ऑन कस्टमर सर्विस’ का हवाला दें। यदि वे फिर भी न मानें, तो एक सादे कागज पर अपनी शिकायत लिखकर उनके कार्यालय में जमा करें और उसकी पावती (Acknowledgement Receipt या रिसीविंग) जरूर लें।

चरण 2: बैंक के नोडल अधिकारी (Nodal Officer) को लिखें

हर बैंक का एक क्षेत्रीय कार्यालय (Regional Office) और एक प्रधान नोडल अधिकारी (Principal Nodal Officer) होता है। आप बैंक की वेबसाइट से उनका ईमेल आईडी या पता निकालकर सीधे उन्हें अपनी शिकायत भेज सकते हैं।

चरण 3: आरबीआई बैंकिंग लोकपाल (RBI Banking Ombudsman)

अगर शिकायत दर्ज करने के 30 दिनों (1 महीने) के भीतर बैंक आपकी समस्या का समाधान नहीं करता है, या उनके जवाब से आप संतुष्ट नहीं हैं, तो आप सीधे भारतीय रिजर्व बैंक के पास जा सकते हैं:

ऑनलाइन पोर्टल: आप आरबीआई के आधिकारिक Complaint Management System (CMS) पोर्टल cms.rbi.org.in पर जाकर अपनी शिकायत ऑनलाइन दर्ज करा सकते हैं।

टोल-फ्री नंबर: आप आरबीआई के हेल्पलाइन नंबर 14448 पर कॉल करके भी मदद और शिकायत की प्रक्रिया जान सकते हैं।

नतीजा: बैंकिंग लोकपाल के पास बैंक पर भारी जुर्माना लगाने और ग्राहक को मानसिक प्रताड़ना के लिए मुआवजा दिलाने का पूरा अधिकार होता है।

13. अक्सर पूछे जाने वाले सवाल (FAQs)

Q.1 क्या अंगूठा लगाने वाले ग्राहक के एटीएम से पैसे निकालने पर कोई अलग से एक्स्ट्रा चार्ज लगता है?

Ans: नहीं, बिल्कुल नहीं। आरबीआई के अनुसार सभी ग्राहकों के लिए शुल्क समान हैं। जो मेंटेनेंस या ट्रांजैक्शन चार्ज एक सामान्य पढ़े-लिखे व्यक्ति के कार्ड पर लगता है, वही अंगूठा लगाने वाले ग्राहक के कार्ड पर भी लागू होगा।

Q.2 क्या अंगूठा लगाने वाले ग्राहकों को चेकबुक के लिए कोई परीक्षा या टेस्ट देना पड़ता है?

Ans: नहीं, बैंक को किसी भी ग्राहक की साक्षरता का टेस्ट लेने का अधिकार नहीं है। ग्राहक को केवल बैंक अधिकारी के सामने फॉर्म पर अपना अंगूठा लगाना होता है और बुनियादी केवायसी (KYC) दस्तावेज देने होते हैं।

Q.3 अगर किसी दुर्घटना के कारण अंगूठे में चोट लग जाए या रेखाएं मिट गई हों, तो बैंक से लेनदेन कैसे होगा?

Ans: ऐसी स्थिति में खाताधारक के दूसरे हाथ के अंगूठे का निशान या पैरों की उंगलियों के निशान (विशेष परिस्थितियों में) को मेडिकल सर्टिफिकेट और गवाहों के साथ बैंक रिकॉर्ड में दर्ज किया जा सकता है। इसके अलावा, आजकल बैंक Fingers Bio-metric या Iris (आँखों की पुतली) स्कैनर का उपयोग भी करने लगे हैं।

Q.4 क्या अंगूठा लगाने वाले व्यक्ति के पास पैन कार्ड (PAN Card) होना अनिवार्य है?

Ans: नहीं, यदि खाताधारक के पास पैन कार्ड नहीं है, तो वे एटीएम या चेकबुक के आवेदन फॉर्म के साथ फॉर्म 60 (Form 60) भरकर जमा कर सकते हैं। यह पूरी तरह से वैध है।

14. निष्कर्ष और आपका अनुभव (Call to Action)

भारतीय बैंकिंग प्रणाली का उद्देश्य समाज के हर वर्ग को सशक्त बनाना है। रिजर्व बैंक ऑफ इंडिया (RBI) के नियम बेहद स्पष्ट और ग्राहक-अनुकूल हैं, जो यह सुनिश्चित करते हैं कि शिक्षा या साक्षरता की कमी किसी भी नागरिक के बैंकिंग अधिकारों के आड़े न आए। यदि कोई बैंक कर्मचारी नियमों की सही जानकारी न होने के कारण आपको एटीएम या चेकबुक देने से रोकता है, तो अब आप जानते हैं कि आपको अपने अधिकारों के लिए कैसे बात करनी है और कहाँ शिकायत करनी है।

अब आपकी बारी (📢 हमें जरूर बताएं):

क्या आपको या आपके परिवार के किसी बुजुर्ग को बैंक में अंगूठा लगाने के कारण कभी एटीएम कार्ड या चेकबुक लेने में कोई परेशानी आई है? बैंक कर्मचारियों का आपके प्रति कैसा व्यवहार रहा?

नीचे कमेंट बॉक्स में अपना अनुभव या सवाल जरूर लिखें, ताकि हमारी टीम या अन्य पाठक आपकी मदद कर सकें।

इस महत्वपूर्ण जानकारी को ज्यादा से ज्यादा शेयर करें (विशेषकर अपने ग्रामीण व्हाट्सएप ग्रुप्स और फेसबुक पर) ताकि हमारे देश का हर एक नागरिक जागरूक और आत्मनिर्भर बन सके!

Disclaimer: इस लेख में दी गई जानकारी आरबीआई के दिशा-निर्देशों और सामान्य बैंकिंग नियमों पर आधारित है। व्यक्तिगत मामलों में बैंक के आंतरिक सुरक्षा नियमों के अनुसार थोड़ी भिन्नता हो सकती है, अधिक जानकारी के लिए अपनी स्थानीय बैंक शाखा से संपर्क करें।


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