खाताधारक की मौत के बाद बिना नॉमिनी के पैसे कैसे निकालें? जानिए पूरा नियम 2026

खातेदार की मौत के बाद बिना नॉमिनी के पैसे कैसे निकालें? जानिए पूरा नियम 2026

किसी भी परिवार के लिए अपने किसी करीबी को खोना सबसे बड़ा मानसिक और भावनात्मक आघात होता है। दुख की इस घड़ी में परिवार पर तब और भी बड़ी मुसीबत आ जाती है, जब दिवंगत व्यक्ति (Deceased) के बैंक खाते में जमा पूंजी की जरूरत होती है, लेकिन बैंक खाते में कोई नॉमिनी (Nominee) दर्ज नहीं होता।

अक्सर लोग आलस्य या जानकारी के अभाव में अपने बैंक अकाउंट, फिक्स्ड डिपॉजिट (FD) या सेविंग स्कीम में नॉमिनी का नाम नहीं जोड़ते। ऐसे में उनकी मृत्यु के बाद परिवार को पैसों के लिए बैंक के चक्कर काटने पड़ते हैं।

अगर आप भी किसी ऐसी ही स्थिति से जूझ रहे हैं, तो घबराइए मत। साल 2026 में भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) के नए नियमों के अनुसार, बिना नॉमिनी वाले खातों से भी कानूनी उत्तराधिकारी बेहद आसान और पारदर्शी तरीके से पैसा निकाल सकते हैं।

इस विस्तृत लेख में हम आपको  बताएंगे कि “खाताधारक की मौत के बाद बिना नॉमिनी के पैसे कैसे निकालें? जानिए पूरा नियम 2026” इसकी पूरी कानूनी और व्यावहारिक प्रक्रिया (Step-by-Step Process) आसान भाषा में समझाएंगे।

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Table of Contents

1. बिना नॉमिनी वाले बैंक खाते की समस्या और RBI का रुख (2026)

जब किसी बैंक खाते में नॉमिनी होता है, तो खाताधारक की मृत्यु के बाद बैंक आसानी से सारा पैसा नॉमिनी को सौंप देता है। नॉमिनी बैंक के लिए केवल एक ‘ट्रस्टी’ या ‘कस्टोडियन’ होता है, जो पैसे लेकर असली कानूनी उत्तराधिकारियों को सौंपता है।

लेकिन जब नॉमिनी नहीं होता, तो बैंक की जिम्मेदारी बढ़ जाती है। बैंक को यह सुनिश्चित करना होता है कि वह पैसा किसी गलत व्यक्ति के हाथ में न चला जाए। इसीलिए बैंक “मृतक क्लेम प्रक्रिया” (Deceased Claim Settlement Process) के तहत पैसे लौटाता है।

महत्वपूर्ण अपडेट (2026): रिजर्व बैंक ऑफ इंडिया (RBI) ने बैंकों को सख्त निर्देश दिए हैं कि वे बिना नॉमिनी वाले मामलों में मृतक के परिजनों को बेवजह परेशान न करें। बैंकों को दावों के निपटारे के लिए एक सरल और डिजिटल प्रक्रिया अपनाने को कहा गया है ताकि पीड़ित परिवार को दफ्तरों के चक्कर न काटने पड़ें।

2. दावा राशि के आधार पर पैसों की निकासी के नियम

बैंकों ने बिना नॉमिनी वाले खातों से पैसे निकालने की प्रक्रिया को आसान बनाने के लिए इसे दो मुख्य भागों में बांटा है। यह इस बात पर निर्भर करता है कि खाते में कुल कितने पैसे जमा हैं:

A. कम राशि का दावा (Small Claims – आमतौर पर ₹5,000 से ₹5,000,00)

1. यदि मृतक के खाते में जमा राशि कम है (इसकी सीमा अलग-अलग बैंकों में ₹50,000 से लेकर ₹5,00,000 तक हो सकती है), तो बैंक बहुत ज्यादा कानूनी दस्तावेज नहीं मांगते।

2. इस स्थिति में बैंक केवल परिवार के सदस्यों से एक इंडेमनिटी बॉन्ड (Indemnity Bond) और लेटर ऑफ डिस्क्लेमर (Letter of Disclaimer) भरवाते हैं।

3. इसके साथ दो ऐसे गवाहों (Sureties) की जरूरत होती है जो बैंक के लिए विश्वसनीय हों और यह पुष्टि कर सकें कि दावा करने वाला व्यक्ति ही मृतक का असली वारिस है।

B. बड़ी राशि का दावा (Large Claims – ₹5 लाख से अधिक)

यदि खाते में बड़ी रकम, बड़ी FD या लॉकर का सामान है, तो बैंक पूरी तरह सतर्कता बरतते हैं। इसके लिए आपको ठोस कानूनी सबूत देने होते हैं, जैसे:

उत्तराधिकार प्रमाण पत्र (Succession Certificate) या

वसीयत (Will) (यदि मृतक ने छोड़ी हो) या

लेटर ऑफ एडमिनिस्ट्रेशन (Letter of Administration)

3. आवश्यक दस्तावेज (Checklist of Documents Required)

बिना नॉमिनी वाले खाते से पैसे निकालने के लिए आपको बैंक जाने से पहले निम्नलिखित दस्तावेजों की एक फाइल तैयार कर लेनी चाहिए। इन दस्तावेजों के बिना बैंक प्रक्रिया शुरू नहीं करेगा:

आवश्यक दस्तावेज (Documents Required)विवरण (Details)
मृत्यु प्रमाण पत्र (Death Certificate)नगर निगम या सरकारी प्राधिकारी द्वारा जारी मूल प्रति।
क्लेम फॉर्म (Deceased Claim Form)यह बैंक की शाखा या वेबसाइट से मिल जाएगा।
कानूनी उत्तराधिकारी प्रमाण पत्रLegal Heir Certificate / Succession Certificate
मृतक के दस्तावेजपासबुक, चेक बुक, एटीएम कार्ड, आधार और पैन कार्ड।
दावेदार (Claimant) के दस्तावेजआधार कार्ड, पैन कार्ड, वोटर आईडी और पासपोर्ट साइज फोटो।
अनापत्ति प्रमाण पत्र (NOC)यदि एक से अधिक उत्तराधिकारी हैं और पैसा किसी एक को चाहिए।
इंडेमनिटी बॉन्ड (Indemnity Bond)गैर-न्यायिक (Non-Judicial) स्टैंप पेपर पर नोटरीकृत।

4. स्टेप-बाय-स्टेप क्लेम प्रक्रिया (Step-by-Step Claim Settlement Process)

यदि आप बिना नॉमिनी वाले खाते से पैसे निकालना चाहते हैं, तो इन चरणों का पालन करें:

चरण 1: बैंक को सूचित करें और खाता फ्रीज कराएं

खाताधारक की मृत्यु की जानकारी मिलते ही सबसे पहले बैंक को लिखित रूप में सूचित करें। बैंक उस खाते को “Deceased Account” के रूप में मार्क कर देगा, जिससे उस खाते से कोई भी अवैध ऑनलाइन ट्रांजैक्शन या एटीएम से निकासी न कर सके।

चरण 2: क्लेम फॉर्म और आवश्यक दस्तावेज जुटाएं

संबंधित बैंक की शाखा में जाएं और “बिना नॉमिनी वाला मृतक क्लेम फॉर्म” (Claim Form for Deceased Account without Nominee) प्राप्त करें। इसे ध्यानपूर्वक भरें।

चरण 3: सभी कानूनी उत्तराधिकारियों के हस्ताक्षर कराएं

यदि मृतक के एक से अधिक कानूनी उत्तराधिकारी हैं (जैसे- पत्नी, बेटा, बेटी), तो उन सभी को फॉर्म पर हस्ताक्षर करने होंगे या किसी एक व्यक्ति के पक्ष में अपना दावा छोड़ना होगा (NOC देना होगा)।

चरण 4: बैंक में दस्तावेज जमा करें और पावती (Receipt) लें

सभी दस्तावेजों को स्व-सत्यापित (Self-Attested) करके बैंक मैनेजर के पास जमा करें। जमा करने के बाद बैंक से एक्नॉलेजमेंट स्लिप (Acknowledgment Slip) जरूर लें, जिसमें तारीख दर्ज हो।

चरण 5: वेरिफिकेशन और भुगतान

बैंक का कानूनी विभाग (Legal Cell) आपके दस्तावेजों की जांच करेगा। यदि सब कुछ सही पाया जाता है, तो बैंक खाते की राशि को क्लेमकर्ता के खाते में ट्रांसफर (NEFT/RTGS) कर देगा या उनके नाम से डिमांड ड्राफ्ट (DD) जारी कर देगा।

5. कानूनी उत्तराधिकारी (Legal Heir) और उत्तराधिकार प्रमाण पत्र क्या है?

कई बार लोग ‘लीगल हेयर सर्टिफिकेट’ और ‘सक्सेशन सर्टिफिकेट’ के बीच भ्रमित हो जाते हैं। आइए इसे आसानी से समझते हैं:

कानूनी उत्तराधिकारी प्रमाण पत्र (Legal Heir Certificate)

यह प्रमाण पत्र स्थानीय राजस्व अधिकारियों (जैसे तहसीलदार, पटवारी या कलेक्ट्रेट) द्वारा जारी किया जाता है। यह केवल यह दर्शाता है कि मृतक के परिवार में कौन-कौन से सदस्य जीवित हैं और उनका मृतक से क्या संबंध है। कुछ बैंक कम राशि के मामलों में इसे स्वीकार कर लेते हैं।

उत्तराधिकार प्रमाण पत्र (Succession Certificate)

जब विवाद बड़ा हो या राशि बहुत अधिक हो, तब सिविल कोर्ट (Civil Court) से सक्सेशन सर्टिफिकेट बनवाना पड़ता है।

भारतीय उत्तराधिकार अधिनियम, 1925 (Indian Succession Act, 1925) के तहत कोर्ट यह तय करता है कि मृतक की चल संपत्ति (बैंक खाता, शेयर, म्यूचुअल फंड) पर किसका अधिकार है।

इसे बनवाने में 3 से 6 महीने का समय लग सकता है और कोर्ट की कुछ फीस भी लगती है। लेकिन बड़ी रकम के लिए बैंक इसी दस्तावेज की मांग करते हैं।

6. अगर एक से अधिक उत्तराधिकारी हों, तो क्या करें? (Relinquishment Deed)

हिंदू उत्तराधिकार अधिनियम या संबंधित पर्सनल लॉ के अनुसार, यदि किसी व्यक्ति की बिना वसीयत और बिना नॉमिनी के मृत्यु हो जाती है, तो उसकी संपत्ति पर उसकी क्लास-1 के उत्तराधिकारियों (जैसे पत्नी, बच्चे और मां) का समान अधिकार होता है।

समस्या: बैंक सभी के खातों में अलग-अलग टुकड़ों में पैसे ट्रांसफर नहीं करता।

समाधान: परिवार के सभी सदस्यों को आपसी सहमति से किसी एक सदस्य को पैसा प्राप्त करने के लिए अधिकृत करना होता है। इसके लिए एक ‘रिलिनक्विशमेंट डीड’ (Relinquishment Deed) या ‘अनापत्ति प्रमाण पत्र’ (NOC) स्टैंप पेपर पर तैयार करवाना पड़ता है, जिसमें बाकी सदस्य लिखते हैं कि “हमें इस खाते का पैसा (मान लीजिए बड़े बेटे) को मिलने पर कोई आपत्ति नहीं है।”

7. बैंकों के लिए RBI की सख्त गाइडलाइंस (समय सीमा)

अक्सर देखा जाता है कि बैंक अधिकारी क्लेम के मामलों को हफ्तों या महीनों तक लटका कर रखते हैं। इस पर लगाम लगाने के लिए RBI ने स्पष्ट गाइडलाइन बनाई है:

15 दिनों का नियम: सभी आवश्यक और सही दस्तावेज जमा करने के बाद, बैंक को 15 दिनों के भीतर क्लेम का निपटारा करना होता है। यदि बैंक बिना किसी ठोस कारण के 15 दिनों से अधिक का समय लेता है, तो आप बैंक के ‘नोडल अधिकारी’ या RBI लोकपाल (Banking Ombudsman) से ऑनलाइन शिकायत दर्ज करा सकते हैं।

8. भविष्य के लिए सीख: नॉमिनेशन क्यों और कैसे जरूरी है?

इस पूरी कानूनी प्रक्रिया और भागदौड़ से बचने का सबसे आसान तरीका यही है कि हम अपने जीवनकाल में ही अपने सभी वित्तीय खातों में नॉमिनी जरूर दर्ज करें।

नॉमिनी कैसे जोड़ें?: आजकल लगभग सभी बैंक (जैसे SBI, PNB, HDFC, ICICI) नेट बैंकिंग या मोबाइल ऐप के जरिए घर बैठे नॉमिनी जोड़ने (Add/Modify Nominee) की सुविधा देते हैं।

फॉर्म DA-1: अगर आप बैंक जाकर नॉमिनी जोड़ना चाहते हैं, तो Form DA-1 भरकर जमा कर सकते हैं।

याद रखें: नॉमिनी को समय-समय पर बदला भी जा सकता है (शादी के बाद या किसी अन्य परिस्थिति में)।

9. अक्सर पूछे जाने वाले सवाल (FAQs)

Q1. क्या बिना नॉमिनी के बैंक खाते से एटीएम (ATM) के जरिए पैसे निकालना सही है?

उत्तर: बिल्कुल नहीं। खाताधारक की मृत्यु के बाद उनके एटीएम कार्ड का उपयोग करना या नेट बैंकिंग से पैसे ट्रांसफर करना कानूनी रूप से अपराध (Fraud) माना जा सकता है, भले ही आप उनके सगे बच्चे या पत्नी क्यों न हों। हमेशा कानूनी क्लेम प्रक्रिया का ही पालन करें।

Q2. यदि मृतक के खाते में लोन (Loan) बकाया है, तो क्या होगा?

उत्तर: यदि खाते में पैसे जमा हैं और कोई लोन भी बकाया है, तो बैंक सबसे पहले अपनी बकाया लोन राशि को उस जमा पैसे से काटेगा (Right of Set-off)। इसके बाद बची हुई राशि ही उत्तराधिकारियों को सौंपी जाएगी।

Q3. उत्तराधिकार प्रमाण पत्र (Succession Certificate) बनवाने में कितना खर्च आता है?

उत्तर: इसका खर्च कोर्ट की फीस पर निर्भर करता है, जो कि कुल दावा राशि का एक निश्चित प्रतिशत (आमतौर पर 2% से 3%) होता है। इसके अलावा वकील की फीस अलग से होती है।

Q4. क्या संयुक्त खाते (Joint Account) में भी नॉमिनी न होने पर यही प्रक्रिया होगी?

उत्तर: नहीं। यदि खाता संयुक्त (Joint Account – Either or Survivor) है, तो एक खाताधारक की मृत्यु के बाद दूसरा जीवित खाताधारक (Survivor) आसानी से खाता चालू रख सकता है या पैसे निकाल सकता है। पूरी क्लेम प्रक्रिया तभी लागू होती है जब दोनों खाताधारकों की मृत्यु हो जाए और कोई नॉमिनी न हो।

निष्कर्ष:

बिना नॉमिनी के बैंक खाते से पैसे निकालना थोड़ा समय लेने वाला जरूर है, लेकिन अगर आपके पास सही दस्तावेज और सही जानकारी है, तो साल 2026 के नए नियमों के तहत यह काम बेहद पारदर्शी तरीके से हो जाता है। दुख के समय में धैर्य रखें और बैंक के नियमों का पालन करते हुए अपना क्लेम फॉर्म जमा करें।

अस्वीकरण (Disclaimer):

यह लेख केवल सामान्य जानकारी के लिए है। अलग-अलग बैंकों के आंतरिक नियम और सीमाएं (Limits) थोड़ी भिन्न हो सकती हैं। सटीक जानकारी के लिए अपनी संबंधित बैंक शाखा से संपर्क करें।

💡 आपकी बारी: अपने परिवार को सुरक्षित करें!

क्या आपके या आपके परिवार के बैंक खातों में नॉमिनी का नाम दर्ज है? आज ही अपने मोबाइल बैंकिंग ऐप या नजदीकी बैंक शाखा में जाकर Form DA-1 भरें और नॉमिनेशन प्रक्रिया पूरी करें। यदि आपको बिना नॉमिनी वाले क्लेम को लेकर कोई समस्या आ रही है, तो नीचे कमेंट बॉक्स में अपना सवाल पूछें, हमारी टीम आपकी मदद करने की पूरी कोशिश करेगी। इस महत्वपूर्ण जानकारी को अपने दोस्तों और परिवार के साथ शेयर (Share) करना न भूलें!


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